* माता-पिता के चरणों में चारो धाम *

रघुपति राघव राजा राम
माता-पिता के चरणों मर चारो धाम ,

पिता आकाश हैं तो माँ हैं धरातल
इनके जैसा न है कोई यहाँ पर ,

निश्चछल प्रेम बरसे जहाँ पर
इनका प्यार है अमृत के समान ,

रघुपति राघव राजा राम
माता-पिता के चरणों मर चारो धाम ,

माता ने अपना धर्म निभाई
पिता ने अपना कर्म निभाया ,

अपने खून-पसीना से हमें योग्य बनाया
इनके बिना सुना है अपना संसार ,

रघुपति राघव राजा राम
माता-पिता के चरणों मर चारो धाम ,

ए अपना हंसी-ख़ुशी भुलाए
रात भर जाग कर हमें सुलाए ,

खुद भूखा रह हमें खिलाए
सम्पूर्ण जीवन हम पर लुटाए ,

रघुपति राघव राजा राम
माता-पिता के चरणों मर चारो धाम।

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 22/01/2016
  2. नरेन्द्र कुमार नरेन्द्र कुमार 23/01/2016

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