* नारी *

नारी हूँ तो क्या हुआ
मैं जगत की जननी हूँ ,

मेरा जन्मना अभिशाप नहीं
मैं ही तो गृहिणी हूँ ,

मैं हूँ दुर्गा मैं हूँ काली
मैं हूँ लक्ष्मी मैं हूँ सरस्वती ,

मैं महामाया सब मेरी माया
सम्पूर्ण जगत में मैं हूँ छाया ,

नारी हूँ तो क्या हुआ
मैं जगत की जननी हूँ ,

मैं हु इष्ट मैं हूँ नूर
मुझ से कोई नहीं रह सकता दूर ,

मैं हु शून्य मेरे बिना सब सुन
दाएँ बैठू मान बढ़ाऊ बाएँ बैठू मान घटाऊ ,

अच्छे-अच्छों को धुल चटाया
मेरी निति कोई समझ न पाया ,

नारी हूँ तो क्या हुआ
मैं जगत की जननी हूँ ,

हर कामयाबी में मेरा हाथ
मेरे बैगर न पुरुष का पुरुषार्थ ,

मैं अमीना मैं हूँ मरियम
मैं हूँ सीता गीता और सबित ,

अपने से मैं क्या बखान
पढ़ लो आप मेरी इतिहास ,

नारी हूँ तो क्या हुआ
मैं जगत की जननी हूँ ,

सभी पुरुष को मैंने जन्म दिया
इस सृष्टि को सभ्यता संस्कृति और कर्म दिया ,

गम्भीरता सहनशीलता मेरा गुण
इसी लिए लोग करते हैं मेरे साथ भूल ,

प्रेम करुणा का सागर हूँ
सभी गुणों में आगर हूँ ,

नारी हूँ तो क्या हुआ
मैं जगत की जननी हूँ।

2 Comments

  1. asma khan asma khan 08/01/2016
  2. नरेन्द्र कुमार Narendra kumar 08/01/2016

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