* वीर हैं *

बहुत वीर हैं वो लोग
जो संयुक्त परिवार चलाते हैं,

बड़ा यत्न से घर-गृहस्ती को
आगे बढ़ाते हैं
कुछ बात को सुनते
कुछ को अनसुना करते
बहुत से बातों का जवाब न देते
धीरे से निकल जाते हैं ,

बहुत वीर हैं वो लोग
जो संयुक्त परिवार चलाते हैं ,

यह तेरा वह मेरा
की भावना को दबाते हैं
तेरे मेरे से उपड़ उठ
दार्शनिक विचार बनाते हैं
अनावश्यक सौख को दबा
खर्च को घटाते हैं,

बहुत वीर हैं वो लोग
जो संयुक्त परिवार चलाते हैं ,

बच्चों की बात को दबाते
नारी रगड़ा से मुख छुपाते हैं
छोटी-मोटी तकरार को भूल
आगे बढ़ जाते हैं
कही-अनकही बातों में
समन्वय बैठाते हैं,

बहुत वीर हैं वो लोग
जो संयुक्त परिवार चलाते हैं।

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