एक वीर जवान का आख़री ख़त

मौत के दरवाज़े खड़ा एक जवान ने परिवार को खुन से लिखकर भेजि एक ख़त ,
जिसमें लिखा था,
“दरवाज़े पे जब मेरा मृत देह तुम देखोगी माँ , अफ़सोस बिलकुल न करना,
बेटा तेरा तो सहीद होने को तेरे कोख में लिया था जनम,
पापा कि आँखों से अगर आँसु निकले , उनसे बस इतना हि कहना ,
एक दिन तो उन्हें सिखना हि था मेरे बिना अकेले रहना ।
तुम्हारि बहु जब कफ़न पे लिप्टा मुझे देखेगि , रोयेगी वह भी बहत,
तुम तब सिर्फ़ उसे गले लगाके कहना , उसका पति था देश का सच्चा सपुत।
मेरे भाई अब तुझे क्या कहु , ख़त में हि भेज रहा हु मेरा प्यार ,
अब तेरे भरोसे छोड़ चला मैं देश और ये परिवार।
मेरे बहन तु जब डोली में ससुराल जाएगी , मन में हिम्मत रखना ,
तेरे भाई तेरे साथ ही है हमेशा , तु बिलकुल भी मत डरना।
बेटा तेरे पापा जा रहे तु उदास न होना , तिरंगे में लिपटा मुझे देख तु एकदम आँसु न बहाना,
तु तो मेरा राज दुलारा , माँ के आँखों का तारा , बड़ा होकर तुझे ही तो है मेरी राह पे चलना।
अब खुन शरीर में बचा नहीं माँ , रुकने को है साँसें , पर तु होना न उदास,
फिर से नया जनम लेके माँ आउगां तुम्हारे हि तो पास।
मेरा ख़त जब तुम्हारे पास पहुँचेगा , दुनिया से जा चुका होगा तुम्हारा ये वीर,
मेरे सामान के साथ ही जाएगा तिरंगे मे लिपटा मेरा मृत शरीर “।

6 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 08/01/2016
  2. Sampa 08/01/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 08/01/2016
  4. Sampa 08/01/2016
  5. omendra.shukla omendra.shukla 09/01/2016
    • Sampa 09/01/2016

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