* मैं पागल *

मैं पागल या पागल यह समाज है
सभी मुझे अपना आईना बनाने को बेताब हैं
कोई हमें डॉक्टर कोई मास्टर है बनता
कोई इंजीनियरिंग तो कोई वकालत है पढता
सभी अपना छबि मुझ में है ढूंढता
मेरी इच्छा को कोई नहीं पूछता ,

मैं पागल या पागल यह समाज है
सभी मुझे अपना आईना बनाने को बेताब है ,

कोई कहता पढ़-लिख कर बड़ा आदमी बन जाओ
कोई कहता अपार प्रतिष्ठा धन-दौलत कमाओ
सभी हमें सभ्यता के शिखर पर चढाने को बेताब हैं
मानवता से किसी को कोई नहीं सरोकार (दरकार) है ,

मैं पागल या पागल यह समाज है
सभी मुझे अपना आईना बनाने को बेताब हैं ,

कोई ट्रिक पढ़ाता कोई दाव है सिखाता
भौतिकी, रसायन, इतिहास भूगोल को रटाता
मानवता का पाठ शायद किसी को नहीं आता
सभी हमें मशीन बनाने को बेताब हैं ,

मैं पागल या पागल यह समाज है
सभी मुझे अपना आईना बनाने को बेताब हैं ,

मैं हाथ मारा पैर पटका बहुत छटपटाया
अपनी जीवन जी लू जुगत लगाया
मनोरोगी बन सुधार गृह में आया
यही मैं अपना आशियाना बनाया,

मैं पागल या पागल यह समाज है
सभी मुझे अपना आईना बनाने को बेताब हैं ,

सभी ने हमें पागल घोसित कर दी
मैं शांत हुआ और मुस्काया
अब मैं अपना जीवन जी लूंगा
इस से अच्छा स्थान और कहीं नहीं पाया ,

मैं पागल या पागल यह समाज है
सभी मुझे अपना आईना बनाने को बेताब हैं।

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 08/01/2016
  2. नरेन्द्र कुमार Narendra kumar 08/01/2016

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