* पैसा *

पैसा सा है बहुत कुछ
पर नहीं यह सब कुछ
इसके बिना यहाँ पर
नहीं है कोई सुख ,

पैसा से है रिश्ता
पैसा से है नाता
फर्ज निभाने में यह
आरे है आता ,

पैसा पराए को अपना
अपनों को पराया बनाता
कोई इसके लिए शीश है झुकाता
तो कोई है सर सर कटता ,

पैसे के चकर में
लोग हैं भटक रहें
इंसानी रिश्ता तोड़
मशीनी नाता जोड़ रहें ,

पैसा ही एक दिन
इस जगत को डुबाएगी
इसकी बहुलता
सभी को रुलाएग़ी ,

पैसे के लिए लोग
क्या-क्या हथकंड़े अपनाते
सही को गलत
गलत को सही ठहराते ,

पैसा है बहुत कुछ
पर नहीं यह सब कुछ।

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 08/01/2016
  2. नरेन्द्र कुमार Narendra kumar 08/01/2016

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