==* जो हुवा *==

मै भी न करू तकरिरे खुदा ये क्या सितम है
ये तो पैमाने लिखें थे बदनाम तकदिर के

कुछ ठहरी हुई दास्ता मै बढ़ रहा हु मगर
ये अफसाने लिखें थे मेरे कुछ उम्मीद के

शौक से मुस्कुराईये हाल-ए-दिल परेशा
जख्म दिलपर दिखते तुटे उन्ही सपनो के

मिलेगा जहां मुकम्मल कोशिश है रात दिन
हुवा बरबाद अब तक पल थे वो कमजोरी के
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शशिकांत शांडीले (SD), नागपूर
भ्र. ९९७५९९५४५०
दि. ०७/०१/२०१६
Jo Huwa

One Response

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 07/01/2016

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