“मेरी क़लम भाग-14″डॉ. मोबीन ख़ान

अग़र हम ख़ुद से बात करें तो,
हर सवाल का ज़वाब मिल ज़ाता है।

गलतियां हमारी ही हैं लोगों की नहीं,
इस बात का एहसास हो जाता है।

इतनी नफ़रत हम क्यों भरे किसी के लिए,
नफ़रत से सब कुछ तवाह हो जाता है।

नर्म दिल बन यक़ीन कर ख़ुदा पर,
दुवाओं से पत्थर दिल भी पिघल ज़ाता है।

क़यामत तक यहाँ ज़ीना नहीं है,
क्यों ज़हर उगलें,अपनों का ही दिल टूट जाता है।

अग़र हम ख़ुद से बात करें तो,
हर सवाल का ज़वाब मिल ज़ाता है।

6 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 07/01/2016
    • Dr. Mobeen Khan Dr. Mobeen Khan 07/01/2016
  2. SALIM RAZA REWA salimraza 07/01/2016
    • Dr. Mobeen Khan Dr. Mobeen Khan 07/01/2016
  3. डी. के. निवातिया D K Nivatiya 07/01/2016
    • Dr. Mobeen Khan Dr. Mobeen Khan 07/01/2016

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