अपना वो दामन बचाकर चल दिए – GAZAL SALIM RAZA REWA

ग़ज़ल –
अपना वो दामन बचाकर चल दिए
जब मिले नज़रें चुराकर चल दिए !

दिल में चाहत लेके आए थे मगर
दर से उनके चोट खाकर चल दिए !

अब यकीं उनकी जुबाँ का क्या करे
जो फ़क़त सपने दिखाकर चल दिए !

मौसम-ए – गुल की तरह आए मगर
गुंचा-ए -दिल वो खिला कर चल दिए !

जब भि गुज़ रे वो मेरे नज़दीक से
ज़ुल्फ़ की ख़ुश्बू उड़ा कर चल दिए !

बन के दुश्मन देखने आए मगर
मेरे हक़ में वो दुआ कर चल दिए !

जब मिले तन्हाईओं में वो “रज़ा ”
दर्द – ए – दिल सुनकर चल दिए !
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फ़क़त ! सिर्फ़
मौसम-ए – गुल ! फूलों का मौसम
गुंचा -ए -दिल ! दिल की कलियाँ

by shayar salim raza 9981728122

4 Comments

  1. Dushyant patel 07/01/2016
  2. SALIM RAZA REWA salimraza 07/01/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 07/01/2016
  4. SALIM RAZA REWA salimraza 07/01/2016

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