“मेरी क़लम भाग 13” डॉ. मोबीन ख़ान

# खता तो हमारी ही थी,
ग़लती हम कर गए।

एक थे तो अच्छे थे,
ना जाने क्यू दो हो गए।

अब वही हमारी परेशानी,
की वज़ह बन गया है,

वो बेटे का फ़र्ज़ अदा नहीं किया,
और हम बाप का फ़र्ज़ अदा कर गए।।

# कल हम नादान थे,
पर इतने परेशान ना थे।।

दौलतमंद हम कम थे,
मग़र किसी के मोहताज़ ना थे।।

आपस में बेइंतहा थी मोहब्बत,
मज़हब के नाम पर गुमराह ना थे।।

लौटा दो मेरा वो सोने की चिड़िया वाला मुल्क़,
उस वक़्त हम ग़रीब थे मग़र बदनाम ना थे।।

5 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 07/01/2016
    • Dr. Mobeen Khan Dr. Mobeen Khan 07/01/2016
      • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 08/01/2016
        • Dr. Mobeen Khan Dr. Mobeen Khan 08/01/2016
  2. Sukhmangal Singh sukhmangal singh 13/01/2016

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