“मेरी क़लम भाग 12” डॉ. मोबीन ख़ान

ज़ब भी लिखता हूँ, दिल-ए-ज़ज़्बात,
आँखों में अश्कों का, समुंदर उतर आता है।।

ज़रा देखो बेबसी, इस क़लम की,
ना चाहते हुए भी, पन्नों पर हक़ीक़त उतर आता है।।

3 Comments

  1. asma khan asma khan 07/01/2016
    • Dr. Mobeen Khan Dr. Mobeen Khan 07/01/2016
  2. Sukhmangal Singh sukhmangal singh 13/01/2016

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