” आगाज “

ए भारत के नौजवानो !
क्यो मुँह लटकाए बैठे हो
लहू तुम्हारा पानी हुआ क्या
जो मातम फैलाये बैठे हो

वो दुश्मन भारत माता के
आँचल को मैला कर रहे
वीर जवानो को छल करके
धराशायी धरा पर कर रहे
श्वान बन बैठे हो क्या जो
चरणो को चाँटा करते है
या बन बैठे हो गिद्ध तुम
अपनो को भी काटा करते है
चलो शेर की चाल तुम फिर
क्यो नजर झुकाये बैठे हो
ए भारत के नौजवानो !
क्यो मुँह लटकाए बैठे हो ।

ये वक्त नही है लडने का
समझो तुम उनकी चाले
बाँट रहे धर्म,मजहब मे हमको
पका रहे अपनी दाले
मर्दानगी सोई रही तो
शरीर कंकाल के जैसा है
मिट जायेगा अस्तित्व तुम्हारा
ये आतंक खून का प्यासा है
भगत,शेखर,बोस की फौजों !
क्यो घुटने दबाये बैठे हो
ए भारत के नौजवानो !
क्यो मुँह लटकाए बैठे हो।

धरा पलटने का साहस हममे
दुश्मनो को ये,बतलाना होगा
अपनी रगो मे सैलाब दहकता
मनसूबो को उनके,जलाना होगा
शान्तिप्रिय है हम,जो चुप थे
पर अब हथियार उठाना होगा
भारतीयो को देखकर काँपे जो
अब ऐसा खौफ बैठाना होगा
तुम हो दहकते अंगारे
क्यो आँसू बहाये बैठे हो
ए भारत के नौजवानो !
क्यो मुँह लटकाए बैठे हो ।

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 06/01/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 06/01/2016

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