सैनिक का दर्द

पवन का एक सहमा दल
फिर सीमाओं पर थर्राया
अग्नि में घुला श्वेत गर्जन
मानवता का हृदय भर्राया,
विनाश रचा जो अम्बर ने
विद्युत संग मेघदूत आया
युद्ध के वीभत्स जंगल में
निर्भिक यमदूत की छाया,
न्यौछावर प्राण अनेकों के
ध्वज भारत का लहराया
वीर सैन्य के बलिदानों ने
पुष्पों का सम्मान बढ़ाया,
आतंकी निर्लज्ज प्रहार में
शैशव स्मृतियां रूठ गई
मात पिता की कथा संग
श्वास अधीर बन खो गई,
छल बेला अमंगल आई
रूठ गई मधुर वो कलाई
अंत भाव जागा निश्छल
संग विरह प्रियतम आई,
भयावह इस अधिकार में
मार्ग मिले छांव खो गई
सुखद वेग बह बह कर
हिमखंडों से दूर हो गई,
रूधिर में जगा है आभास
स्वतंत्र है मनु की श्वास
छन्द यह नयनों का या
करूणा में बरसा आकाश,
समर्पण शीशों का कहता
सर्द शिखर कंपन उठता
तरंगों ने भी चित्र उकेरा
दर्द सैनिकों में था गहरा।

…. कमल जोशी ….

4 Comments

  1. asma khan asma khan 06/01/2016
    • K K JOSHI K K JOSHI 06/01/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 06/01/2016
    • K K JOSHI K K JOSHI 06/01/2016

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