सुनहरी सुबह

बागो में सारे फ़ुल खिल गए, तितलियाँ देख मुस्कुराई,
पंछी पेड़ों पर चहचहा उठे , जब सुबह ने लि अंगराई।।

जाग जा एै खुदा के बंदे , देख तु चारों और,
तुझे रिझाने ,तुझे जगाने आए है कैसा चितचोर।।

उजली किरणें दे रहि दस्तक , जंगल में नाचे मोर,
तेरे दरवाज़े अब तक खड़ी है , सुन्दर रंगीली भोर ।

कोयल मीठी गीत सुनाए , किसान जोते हल,
अब तो जाग एै नादान परिंदे , सोना फिर तु कल।।

बीत गया जब रात घनेरी, तु सोया अब भी चादर ताने!
कितनी बार तुझे जगाने को आवाज़ लगाई , तेरी ही अपनी माँ ने।।

पागल अब तो आँखें खोल के देख ले रंगीन सुबह कि नज़ारे,
कल का न जाने क्या भरोसा , फिर न आए एैसि बहारें ।।

आज का दिन जब हाथ लगी है , सो के इसे न गवाह,
खुँशिया लेके हमेशा नहीं आति हर दिन कि नयी सुबह।।

5 Comments

  1. asma khan asma khan 06/01/2016
    • Sampa 06/01/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 06/01/2016
    • Sampa 06/01/2016
      • Sampa 06/01/2016

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