“मेरी क़लम”डॉ. मोबीन ख़ान

तुम मुझे ज़ख़्म दो,
पर मैं तेरा मरहम हूँ।

तुम अँधेरा करो मेरी ख़ातिर,
पर मैं तेरा आफ़ताब हूँ।।

तुम मुझे ठुकराओ कोई बात नहीं,
पर मैं तेरा क़द्रदान हूँ।

तुम मुझे अल्फाज़ ना समझो,
मैं तो तेरा कलाम हूँ।।

तुम मुझे पत्थर समझो तो कोई बात नहीं,
पर मैं इन सब के लिए तेरा शुक्रगुज़ार हूँ।।

7 Comments

  1. asma khan asma khan 05/01/2016
    • Dr. Mobeen Khan Dr. Mobeen Khan 05/01/2016
  2. sunil kumar 05/01/2016
    • Dr. Mobeen Khan Dr. Mobeen Khan 05/01/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 05/01/2016
    • Dr. Mobeen Khan Dr. Mobeen Khan 05/01/2016
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 05/01/2016

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