“मेरी क़लम”डॉ. मोबीन ख़ान

समुन्दर सिर्फ़ तवाही मचाता है,
इसे ग़ुरूर है अपनी बादशाहत पर।।

प्यास इसे पी नहीं सकता,
ये बस ख़ुश होता है सब कुछ बर्बाद करने पर।।

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