एहसास

तुम जब कभी मिलने आओ
देखो हमको न बताना
तुम कहीं आसपास भी होगी
तो हमको न जताना
एकाएक तुम्हारे होठों की
फूलों सी मुस्कान आयेगी
तो यह मौसम बदल जायेगा।
पिधलती रात में
अंधेरा तन्हा हो जाता है
चांद भी बिना मिले चला जाता है
तुम मेरे ख्वाबों में न खो जाना
तब समन्दर नहीं
खुद की परछाई लांध आना
मुरझाये फूलों का अंग खिल जायेगा।
प्यार को किसी डोर से न बांधना
दिल की बात होंठों पे लाना
धड़कनों के रास्ते खुशबुओं को
गुलाब की तरह बिखराना
कांटों को उसके न सोचना
मिलने आओ न आओ कभी
एहसास अपनेपन का
हमेशा दिल में बसाये रखना।

………. कमल जोशी ………

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