“मुस्कुरा कर ना चलें”डॉ. मोबीन ख़ान

कह दो उन्हें की हर घड़ी,
मुस्कुरा कर ना चलें।

मेरा दिल मचल जाता है,
यूँ सरमा कर ना चलें।।

अग़र पास आना नहीं है,
तो अदा दिखाकर ना चलें।

मैं तो संभल जाऊँगा पर ज़माने का क्या,
गुज़ारिस है की हुस्न दिखा कर ना चलें।।

ये ज़िस्म तेरा कोई नुमाइस की चीज़ नहीं,
इसे यूँ ही सरेआम करके ना चलें।

कह दो उन्हें की हर घड़ी,
मुस्कुरा कर ना चलें।।

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