क्यो बनाऊ मै किसी से अपना रिश्ता?

क्यो बनाऊ मै किसी से अपना रिश्ता ?
जल रही थी जब
मेरी आँखो की मस्ती
मझधार मे अटकी पडी थी
मेरी कस्ती
कौन था जो था
मेरे संग मेरा अपना
टूटकर बिखर गया
धुमिल हुआ जीवन का सपना
यादो ने कर दी थी मेरी हालत खस्ता
क्यो बनाऊ मै किसी से अपना रिश्ता ?
तहस-नहस हुई जिन्दगी
राह मे बिखरे थे कांटे
लडखडा उठे थे कदम जब
कमजोर थे मेरे इरादे
मन मेरा उम्मीद खोकर
रोज छिपकर जब था रोता
अनकही बातो को सुनकर
कौन मेरे आँसू मे रोता
बेहाल होकर जिन्दगी से,बंध गया था मेरा बस्ता
क्यो बनाऊ मै किसी से अपना रिश्ता ?
जब जरूरत मुझको आई
खुद को तन्हा मैंने पाया
पीत हो चुके पत्तो की भाँति
दुनिया ने मुझको ठुकराया
जब ना बाँटे गम को कोई
उम्मीद किसी से क्या लगाऊ
मीत है सब तेरे सुख के
क्यो भला मै दर्द उठाऊ
गुम हुई खुशिया,आँसू हो गये है सस्ता
क्यो बनाऊ मै किसी से अपना रिश्ता?