” ओस सी बेटी “(हाइकू)

नन्ही,नाजुक
निर्मल,काँपती-सी
ओस की बूँद ।

केले के पात
बिखरते ये मोती
हँसती नार ।

हल्का-सा स्पर्श
धुमिल – सा इत्र
नारी चरित्र ।

सूर्य किरण
मिटता ये अस्तित्व
ओस-सी बेटी ।

2 Comments

  1. Er. Anuj Tiwari"Indwar" Er. Anuj Tiwari"Indwar" 03/01/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 04/01/2016

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