! ! कामधेनु! !

हे
नर
हैवान
भक्षक तू
उद्दण्ड पूत
खोके कामधेनु
करता तू व्यापार ।

ये
गाय
अमृत
कामायनी
रोगनाशनी
महकता दर
उज्ज्वल होगा घर ।

ये
दूध शरीर
मल-मूत्र
उच्छ्वास भी
समर्पित तुझे
जीने दो बस मुझे ।

दो
रक्षा
गौधन
खेती बाडी
माता पुकारे
आँसूओ के धारे
जग पालनी रोये ।