अबके बरस जिंदगी कुछ इस तरह रोशन करो

अबके बरस जिंदगी कुछ इस तरह रोशन करो
प्यार के इस कारवां मे नफ़रतों के नाम न हो ।
हर कोई अपना सा है बेगानों के इस शहर मे
साज छेड़ो दोस्ती के दुश्मनी की बात न हो ।
क्या खुशी क्या बेबसी सब वक़्त की सौगात है
मुस्कुराना दिन है तो आँसू बहाना रात है ।
हर ग़म खुशी के आगे मजबूर हो सकता है
बस जिंदगी के इस सफर मे ग़म कोई सामान न हो ।
कह रहें हैं रास्तों मे बिखरे हुए पत्थर यहाँ
ठोकरें खाकर वो कितनी दूर तक आ पहुंचे हैं
मुश्किलों से भागकर रोना नहीं है ज़िंदगी
आगे बढ़ो इस तरह की कोशिशें नाकाम न हों।
। । नव वर्ष मंगलमय हो । ।
…………………..देवेंद्र प्रताप वर्मा”विनीत”

3 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 01/01/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 01/01/2016
  3. omendra.shukla omendra.shukla 02/01/2016

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