नये साल का स्वागत

कुछ और पल हाथ में बस फिर इस साल को कहेगें अलविदा,
कल का सुरज नया होगा ,होगा एक नया सवेरा।
जितने भी थे अरमान हमारे ,नये साल में होगा पुरा,
कुछ भी बाक़ी नहीं रखेंगे , कुछ भी न छोड़ेंगे अधूरा ।

नफ़रत मन से दुर करगें तो मिलेंगे दिल से दिल,
पुराने रिवाजों को भुलाके हमसब ख़ुशियों में होगें सामिल।
भेदभाव में कुछ नहीं रखा , हम सब एक देश के है वासि,
ख़ुशियों से क्यु न भर दे मन को , मिटा दे चेहरे कि उदासी।

साल दर साल तो आते रहेंगे यादें कुछ तो रहे ख़ास ,
कल को किसने आते देखा है, सिर्फ़ आज तो है हमारे पास।
क्यु न हम सब मिलकर नये साल को यादगार बनाए,
हिन्दु,मुस्लिम, सिख, ईसाई की भेदभाव भुलकर जमकर ख़ुशियाँ मनाए।

8 Comments

  1. Manjusha Manjusha 31/12/2015
    • Sampa 31/12/2015
  2. md. juber husain md. juber husain 01/01/2016
    • Sampa 02/01/2016
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 01/01/2016
    • Sampa 02/01/2016
  4. omendra.shukla omendra.shukla 02/01/2016
  5. Sampa 02/01/2016

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