शुभ नव वर्ष

नव- प्रभात, नव-दिवस, , नव -वर्ष
शरद ऋतू ,वसुंधरा की छटा निराली
मन मयूर प्रफुल्लित करती शीतल पवन
कलरव करते पक्षी , फैली चहुँ ओर हरियाली

श्यामल श्वेत बदली की चादर ओढ़ धरा
सूर्य की प्रथम किरण नव सन्देश लिए
शुभ स्वागत हेतु प्रकृति खड़ी
ज्यों प्रीतम के लिए प्रियतमा प्रति- क्षण जिये

दूर क्षितिज पर गगन झुका धरा पर
प्रेम रसपान की करता अभिलाषा
धरा गगन के अनुपम मिलन से
पूर्ण होती श्रृंगार – रस की नई परिभाषा

शीतल मंद वायु में अपनी सुगंध मिलाते
पुष्प पराग सदा भँवरे हैं पीते
सदैव प्रसन्न चित ,करते मधु पान
पर पुष्प सदा काटों में हैं जीते

उड़ते पंख दूर नीलगगन में
ज्यों धरती की शोभा बढ़ाये
है हित इच्छा कि आपके जीवन में
सदैव खुशियों की फसल लहराए

नव वर्ष की इस मंगल बेला पर
मुझ संग प्रकृति दे रही बधाई सन्देश है
बीते वर्ष कोई भूल हुई हो अगर
तो विनम्र क्षमा प्रार्थी हितेश है

हितेश कुमार शर्मा

3 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 31/12/2015
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 01/01/2016
  3. Hitesh Kumar Sharma Hitesh Kumar Sharma 04/01/2016

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