पुराना प्यार

फ़ुल बीछाया है हमने आज उनके राहों में ,
ताकी चोट न लग जाए उनके पाँव में ।
ऐै फुलों सहला देना तुम्हारे कोमल स्पर्श से ,
कहीं कोई कँाटा न आने देना उनके राह में
दर्द जो उनको हुआ तो दिल से खुन मेरे बहेगें
आशु अगर निकले तो यह हम नहीं सहेगें।
चाहे वह न जान पाए कौन असका कर रहा है बरसों से ईतंजार
पर जीवन में हमने तो किया है न सिर्फ़ उनसे ही प्यार ।
क्या हुआ जो हम उनको दिल की बात बता न पाए
ईतंजार तब तक करेगें जबतक बह न मूझे भुल जाए।
हा असके बिना मै न जी पाउगां , पर जब तक है जान मै यही इतंजार करुगंा।
सायद एक दिन मुझपर ध्यान पर जाए
यही फ़ुल उसके काम आजाए
हा हुइ तो फ़ुल तु सहरा बन जाना , न हुइ तो मेरे मैयत पर सज जाना।

3 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 31/12/2015
    • Sampa 31/12/2015
  2. कड़वा शब्द kadwashabd 12/01/2016

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