रिश्तों के गुलशन- शिशिर “मधुकर”

क्या कोई ऐसा प्राणी है जिसके संग में ग़म ना हों
खुशियाँ सागर के पानी सी कभी ना जीवन में कम हों
अक्सर ग़म का कारण तो झूठे रिश्ते और तन्हाई है
जाने क्यों ये दोनों पीड़ाए बस मेरे हिस्से में आई हैं
किस्मत वाले होते हैं जिन्हे साथी उत्साही मिलते है
सबसे खुलकर मिलने से तो रिश्तों के गुलशन खिलते हैं
जीवन के हर क्षण में जो नफ़ा नुकसान टटोला करते हैं
उनके कंठ से कोयल ना कौवे ही बोला करते हैं
ऐसे लोगों के दामन में खुशियाँ आम नहीं होतीं
तपते मन आँगन में उनके कोई ठंडी शाम नहीं होतीं.

शिशिर “मधुकर”

6 Comments

  1. salimraza salimraza 31/12/2015
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 31/12/2015
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 31/12/2015
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 31/12/2015
  5. Mohit rajpal Mohit rajpal 31/12/2015
  6. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 31/12/2015

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