कीमत ज़िन्दगी की।।

ज़िन्दगी की किमत बहुत काम है यहां
इंसानियत सिर्फ एक शब्द है जहां
खुदगर्ज़ी सिर्फ कुत्ते मे दिखती है
चन रुपयो के लिए खाकी बिकती है
सुंदरता सिर्फ चेहरे पर है
मन सबके काले है
दुनिया उन्ही से चलती है
जो पैसे वाले है

चीजो की किमत सुनी थी अब इंसानो की भी लगती है
थोड़े थोड़े पसो मे औरतो की इज़्ज़त बिकती है
छोटे छोटे बच्चों से बीख जहां मंगवाई जाती है
उस देश मे नेताओ की लाखो की मुर्तिया आती है

आम आदमी पिस्ता है
टूटता है फिर भी खुद को घिसता है
दो रोटी की बुख मिटाने
लाखो के दखे खाता है
तब कहीं जाकर वो दो पल का चैन पाता है
इधर जाये या उधर जाये
कहाँ जाये जहां मन को शांति मिल जाये
कभी मंदिरो मे ढूंढो
कभी मस्जिद मे
कभी कैलाश चला जाये
तो कभी मक्का मदीना छु आये
पर जो किया ही इंसान का हो तो
तो उसे भगवान भी कैसे मिटाये

मोहित राजपाल

4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir 31/12/2015
    • Mohit rajpal Mohit rajpal 31/12/2015
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 31/12/2015
    • Mohit rajpal Mohit rajpal 31/12/2015

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