मिटे जाति (पिरामिड)


जात
सिमटी
मानवता
पिसता पिता
विचलित मन
धन लोलुप तन ।

ये
शादी
लालच
बलवान
पिता की आन
दहेज दानव
पराजित मानव ।

हो
खत्म
दायरे
पराजित
लालच वंश
मिलते इन्सान
बदलते हालात ।

दे
दर्जा
समान
जाति भाव
जले अलाव
भिन्नता विदीर्ण
ध्वंस सोच संकीर्ण ।

दे
मिटा
जातीय
विषमता
प्रेम पनपा
महकता कल
चहकता वो पल ।

2 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 01/01/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 01/01/2016

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