मुक्तक। कर्म,हौसला,कल्पना, के प्रति।

मुक्तक।कर्म,हौसला,कल्पना के प्रति।

कर्म से जीवन सभी का है तरा तुम देख लेना ।।
हौंसलो की उड़ानों को जरा तुम देख लेना ।।
रास्तों के ही बिना जो कल्पनाओं में बढ़ें हैं ।।
मिल नही पाती हक़ीक़त की धरा तुम देख लेना ।।

@ राम केश मिश्र

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