||भारत के वीर सपूत ||

“बेसुरा राग ये जीवन का
किसने फिर अब गाया है
किसको है प्यारी मौत अपनी
जो बलिवेदी पे चढ़ आया है ,

सहस्र भुजाओं का वो संगम
जिसने टुकड़ो में सर काटे थे
उड़ा दुश्मन की धज्जिया गंगन में
मुछो पे ताव जमाये थे ,

वीरों की उस मातृभूमि पे
फिर दुश्मन ने पैर पसारा है
लहू नहीं वो पानी है
जिसको भारत नहीं ये प्यारा है ,

काँप उठे ये दुनिया सारी
सिंह के जैसे दहाडो तुम
चिरके दुश्मन की छाती
वो तांडव फिर से ला दो तुम ||”

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