कितना बदल गया आदमी

देख आज कितना बदल गया आदमी !
आदमी को आज खा रहा है आदमी !!

अपने बहन बेटियों से करते है गुनाह ,
हवस में इस कदर पागल है आदमी !
बिक रहा है जिस्म और बिक रहा जाम ,
पैसों के लिए आज बिक रहा है आदमी !!

गुप्तनीति बेंच दी दुश्मनो को आज ,
सैनिक में भर्ती हो गए है ऐसे आदमी!
रो रहा है आसमां और रो रही जमीं,
माँ भारती की आँखों में दिखने लगी नमी!!

अपनी संगिनी को छोड़ वीयर वार में ,
पैसों में जा के प्रीत ढूढ़ता है आदमी !
खरीदते और बेंचते है मौत का सामान ,
गुनाहों में इस कदर शामिल है आदमी!!

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