एक बेटि की पुकार

माँ अचानक मेरी सासे कयु कम हो रही है ,
तु क़ाहा है माँ तेरी बेटी ढुंढ रही है तुझे ,
सायद ये पल आख़री हो , क्या मै तुझे कभी न देख पाउंगी ?, बिना तुझे देखे मर जाउंगी ?, काश आज घर से निकली ही न होती !, तेरे साथ आख़री सासँ तक तो रह पाती !, क्या पता था सुबह जब घर से निकली तो शाम न देख पाउंगी , आज का दिन आख़री दिन होगा घर वापस न जा पाउंगी , कभी सोचा न था इतनी सी होगी मेरी जीदंगी , ख्वाहिस जो दिल में थी वो पुरी न हो पायेगी , माँ तेरी गोद में सर रखके फिर कभी सो न पाउंगी , जो मेरे पास होने की ख़ुशी में पापा ने सायकल दिलाए थे उसे चला न पाउंगी , भैया से कहना अब मेरा कमरा उनका हो जाएगा , मेरी चीज़ें ही याद बन के रह जाएगा , अब जाने का समय आरहा है माँ , आँखो के सामने अधेंरा छा रहा है , मेरे जाने का दुख मत करना , एक दिन तो सबको है मरना ।

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