||नाबालिग संविधान ||

“रेप करो या चोरी तुम
ना तुम्हे कोई मिटा पायेगा
कत्लेआम करो तुम खूब
ना तुम्हे पकड़ कोई पायेगा
मिले अगर कीमत अच्छी तो
हर कोई पल में बिक जायेगा
हो नेता या कानून का रखवाला
दो पैसे पे बिक जायेगा
भरी हो जेब अगर पैसो से
तो सजाये नहीं तुम्हे मिलेंगी
खली जेब अगर होगे तुम
तो रोटी भी नसीब नहीं होगी
रखवाला है कानून तुम्हारा
करता है पैसो की गुलामी
सरे बाजार यहाँ होती है
इंसाफो की दिन रात नीलामी
नाबालिग कोई न अपराधी है
नाबालिग है संविधान हमारा
अच्छे बुरे का पता नहीं
फिर करता है न्याय हमारा ||”

4 Comments

  1. Manjusha Manjusha 29/12/2015
  2. omendra.shukla omendra.shukla 30/12/2015
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 30/12/2015
  4. omendra.shukla omendra.shukla 31/12/2015

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