||आखिरी पुकार ||

“बनके कहीं से सपना तू
आखों में फिर से बस जाये
राते है लम्बी-लम्बी और
नींद मुझे ना इक पल आये,

वक्त अगर जो थम जाये
हर मुश्किल आसाँ हो जाये
मिल जाती सहज ही हर मंजिल
जो साथ तेरा मिल जाये ,

अपने भी पराये हो जाते है
जब ये वक्त बदल जाता है
हो जाते है अधूरे हर सपने
जब वक्त खफा हो जाता है ,

इस दिल की आखिरी पुकार हो तुम
आखों में बहता प्यार हो तुम
करों ना खुद से जुदा मुझे
मेरे जीवन का आधार हो तुम ||”

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