? याद तुम्हारी आती है ?

? याद तुम्हारी आती है ?
हो जाता है मन फिर उदास,
जब याद तुम्हारी आती है!
हो जाता निशा के साथ-साथ,
निन्दिया आँखों से जाती है!!
नयन कपोलो को मीचु तो,
तू ही तू दिख जाती है!
तब कलम आपही लिखने लगती,
कुछ शब्द कोष बुन जाती है!!
तेरे अधरो के मधुर वचन,
जब खयालात में आते है!
तब थिरक-थिरक के मन मयुर,
बस तुझको आज बुलाते है!!
तुम तोड़ गए सपने सारे,
दिल के टुकडे हजार किये!
हम फिर भी मन संतोष लिये,
बस उन्हें बटोरे जाते है!!
क्यो निठुर बन गयी तुम इतना,
ये बात समझ न आती है!
है वक्त ये कैसा बदला मेरा,
अब रात डराये जाती है!!

?कवि
राजपुत कमलेश “कमल”

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