??माँ……!??

??माँ……!??
माँ……!
माँ पर्मेश्वर का साक्शात्कार है!!
माँ……!
माँ रेगिस्तान में बहेता मीठा झरना है!!
माँ……!
माँ सुबह का पहेला कलेवा है!!
माँ…..!
माँ कुदरत का दिया अनमोल तोहफा है!!
माँ…..!
माँ तपती धूप में शीतल नीम की छाओ है!!
माँ…..!
माँ ममत्व का सच्चा प्रमाड है!!
माँ…..!
माँ आत्मा से निकली निर्मल पुकार है!!
माँ…..!
माँ विधाता से मिला अमोल उपहार है!!
माँ…..!
माँ दुलार से दी हुई हल्की सी थपकी है!!
माँ…..!
माँ दुःख में निकली आत्मा की सित्कार है!!
माँ…..!
माँ ममता से छलक्ता समन्दर है!!
माँ…..!
माँ आन्चल से दिया जीवन का प्रसाद है!!
माँ…..!
माँ प्रेम का पहेला प्रमाड है!
माँ……!
माँ के बिना जीवन निराधार है!!
माँ……!
माँ है तो श्रुश्टी साकार है!!
माँ…..!
माँ के बिना सुना सन्सार है!!
माँ…..!
माँ ही तो जगत का आधार है!!
?लेखक
राजपुत कमलेश “कमल ”

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 28/12/2015
  2. omendra.shukla omendra.shukla 28/12/2015

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