“हक़ीक़त” डॉ. मोबीन ख़ान

चाँद है पर चांदनी नदारत।
फ़ूल हैं पर ख़ुश्बू नदारत।।

इंसान हैं पर इंसानियत नदारत।
नफ़रत है पर मोहब्बत नदारत।।

ये कलयुग है मेरे दोस्त।
दोस्त तो है पर दोस्ती नदारत।।

4 Comments

  1. omendra.shukla omendra.shukla 28/12/2015
    • Dr. Mobeen Khan Dr. Mobeen Khan 30/12/2015
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 28/12/2015
    • Dr. Mobeen Khan Dr. Mobeen Khan 30/12/2015

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