आईनो का सच – बी.के.गुप्ता ‘हिन्द’

आईनो का सच

बनकर राम घूम रहे है ,
दिल में छिपा जिनके रावण।
नैतिकता का पाठ पढ़ाते,
बातें करते हैं मनभावन।।

सम्हल कर रहना यारो इनसे ,
अब राम नहीं बस हैं रावण।
सबको दिखता अपना स्वार्थ ,
कैसे होगा अब मन पवन।।

आईने बदल रहे दिन प्रतिदिन ,
कैसे देखें अब हम दर्पण ।
प्रेम ,दया जब दिल में न हो,
कैसे होंगे प्रभु के दर्शन ।।

रचनाकार –
बी.के.गुप्ता ‘हिन्द’
मोब-9755933943

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