करके प्यार दिल में – बी.के.गुप्ता ‘हिन्द’

करके प्यार दिल में छिपाते हो किसलिए,
नज़रों से नज़र हमसे चुराते हो किसलिए
प्यार करने वालों का अंदाज़ अलग है ,
कातिल अदा से बिजली गिराते हो किसलिए
कट रही है तेरे बिन ये तन्हा ज़िंदगी ,
सपनो में आके नींदे चुराते हो किसलिए
अँखियाँ तरस गईं तेरे दीदार को ,
इस चाँद से चेहरे को छिपाते हो किसलिए
रचनाकार –
बी.के.गुप्ता ‘हिन्द’
मोब-9755933943

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