“ज़िन्दगी बस तू इतना बता अभी कितना सफर और बाकी है।”

“ज़िन्दगी बस तू इतना बता
अभी कितना सफर और बाकी है।”
गमो के बीच से कहीं ख़ुशी कभी दिख जाती है।
वक़्त बेवक़्त उसकी याद बहुत आती है।
दिल के किसी कोने में अरमान है अभी भी भागते।
अब तो ये भी नहीं मालूम कितनी रातें निकल गयी उसकी याद में जागते।
सुकून की दो सांस पता नहीं कब मुझे आएगी।
सपने में ना सोचा था मुझेे छोड़ वो कहीं दूर चली जाएगी।
समझा मैं ये अच्छी तरह
कोई किसी का ना सचा साथी है।
ज़िन्दगी बस तू इतना बता
अभी कितना सफर और बाकी है।।

हाथ में हाथ डालें कभी बैठते थे उनके पास
वक़्त ने ऐसी करवट ली की मिलने तक की ना रख पाये आस ।
कभी वादें किये थे बड़े विश्वास के साथ
कुछ भी हो जाये ना बिछड़ेंगे हाथो से हाथ
आज हम उनसे दूर और वो भी हमसे दूर
हम भी मजबूर और वो भी मजबूर
छोड़ कर मुझे अकेला वो कहीं चली गयी यूँ
ज़िन्दगी के चौराहे पर कल भी तनहा था आज भी तनहा हूँ
इंतजार है मुझे भगवन के बताने की
इतनी भी क्या जल्दी थी उसे अपने पास बुलाने की
समझा मैं ये अच्छी तरह वक़्त किसी का ना सच्चा साथी है।
ज़िन्दगी बस तू इतना बता
अभी कितना सफर और बाकी है।।

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