उम्मीद

वक्त, वक्त-बे-वक्त मेरा बदलता गया
मै अनजानी राहो पे ही कदम रखता गया
खूब रोका लोगों ने, ना बढ पाऊ मै
कैद करके अरमान अपने पिंजरे मे रह जाऊ मै
मै बंद हूँ पिंजरे मे, तो भी जग की खबर है
छोटा हू भले ही पर आसमां पर नजर है
ना आकर्षण का धागा खींचेगा मुझको
ना रिश्तो की माया मुझे बाँधे रहेगी
मै उडता बादल हूँ आसमा पे मुझको छाना
मुश्किले तो राह मे आती रहेगी
दृढ हूँ मै, जग बदलने का मुझमे दम है
साहसी हू मै, ना हुस्न मेरा किसी से कम है
मुश्किलो मे पल रहा है ये परिन्दा
मंजिलों की चाह रहेगी जब तक है जिन्दा
उम्मीद मेरी है यही, मै मेहनत करता जाऊ
सब सुनेंगे एक दिन मेरी, ऐसी अपनी राह बनाऊ ।