देखा/ कुछ न देखा

आंखो के सामने उलझते देखा
दो दोस्त को बिगड़ते देखा
दो प्यार को लड़ते देखा
दो फूल को टूटते देखा ।

न देखा तो,

किसी को बनाते न देखा
किसी को मानते न देखा
प्यार को हँसाते न देखा
दोस्त को बुलाते न देखा
दो फूल को खिलते न देखा।

-संदीप कुमार सिंह

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