शासन

शासन
अमीरों का रिश्ता अमीरों से रहा, गरीबों का रिश्ता ग़मों से रहा।
नेताओं का वादा झूठा रहा, गरीबों का मत यूँ ही लूटता रहा।।
ओले गिरते रहे सूखा पड़ता रहा, मोल डीजल सिलेंडर का बढ़ता रहा।
शासन सोता रहा गरीब रोता रहा, जीना भी क्या अब जीना रहा।।

रचनाकार –
बी.के.गुप्ता”हिन्द”
मोब.9755933943

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