मै स्वार्थी हूँ

मैंने सुना जब तक लोगो का कहना
मै बहुत ही अच्छा था
सीधा था मै, भोला था
दिल का बिल्कुल सच्चा था
सहायता की जबतक दूजे की
नजर झुका कर जीता था
अपने अरमान मारकर सारे
स्वप्न उनके ही बिनता था
मै सुशील था, संस्कारवान था
गुणवान चरित्र का इन्सां था
जब से पाले खुद के सपने
सब कमी मुझमे ही आने लगी
अपने जज्बातो की फिक्र हुई तो
स्वार्थी दुनिया बताने लगी
मै आज भी हूँ ऐसा ही
बस खुद के सपनो को पाला है
ना धोखेबाज, ना चरित्रहीन हूं
ना किसी को कभी सताया है
खुद को साबित करना है स्वार्थ
तो हाँ मै स्वार्थी हूँ
बाद मे कोई कुछ भी बोले
मै जीवन का परीक्षार्थी हूँ
मै कितना बुरा हूँ दुनिया की नजर मे
भगवान ईमान मेरा जानता है
बस निकला हू जीवन का मोल चुकाने को
जिसे बुरा लगे छोड जाये मुझको
दुनिया है मुझे अपनाने को ।