मुझे कदम कदम पर

मुझे कदम कदम पर चौराहे मिलते है
मंजिल की राहो पे दो राहे मिलते है
डर लगने लगा है अब तो इन्सानों से
मासूम चेहरों के पीछे खौफनाक साये मिलते है
मुझे कदम कदम पर इम्तेहान मिलते है
अनजानी राहो पे ही मुकाम मिलते है
क्या घबराना गमों की राहो से
पतझड के बाद फिर से बागान खिलते है
मुझे कदम कदम पर तूफान मिलते है
अपनो की चाह मे लोग अन्जान मिलते है
कोई क्या साथ देगा दुख की राहो मे
अन्धकार की राहो मे साये भी कहाँ मिलते है।