मुक्तक

कल देखा था मैनें , वह ख्बाव हो गया |
बोतल में पानी था , वह शराब हो गया |
सँभल सँभल कर चलना मेरे दोस्त अब ,
जमाना आज का , अब ख़राब हो गया ||
आदेश कुमार पंकज

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