मुक्तक

किससे कहूँ मन की व्यथा ,
अब कौन अपना है कहाँ |
स्वार्थ वश है चल रहा ,
जब विश्व में सारा जहाँ |
जब भी मन का द्वार खोला ,
लुट गया हर बार मैं ,,
विश्वास करने वाले पंकज ,
अब लोग रहतें हैं कहाँ |
आदेश कुमार पंकज

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