मुक्तक

सूरज यहाँ का फिर , सबको जला गया |
जाड़ा यहाँ का फिर , हमको गला गया |
वीरान बस्ती और , खण्डहर कह रहें हैं,
धोखे से पंकज फिर , उसको छला गया ||
आदेश कुमार पंकज

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