दोहे

पंकज उससे सीखिये , बीत गया जो कल |
आगे भूल न कीजिये , सँवर जाये हर पल ||
समझदार कहलात है , चलता आँखें खोल |
पंकज सोच समझ जो,है सदा बोलता बोल ||
झूठ सदा ही झूठ है , कितने करे प्रलाप |
पंकज सच के सामने , उड़ जाये बन भाप ||
पंकज कभी न सोचिये ,कि तुम बहुत महान |
तुच्छ पत्र बन जाओगे ,जब आयेगा तूफ़ान ||
आदेश कुमार पंकज

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