आखिर कौन सही

माना मेरी सोच सही है
पर नजरिया तो उनका भी गलत नही
चलो ठीक है, मै नये जमाने का हूँ
पर अनुभव तो उनका भी परस्त नही
माना प्यार मे जाति नही देखी जाती
पर प्यार को मिटते देखा है मैंने
चलो प्यार मे नही बाधा होती सुन्दरता
पर बाद मे रिश्तो को उलझते देखा है मैंने
धर्म बदल लेने से आदत नहीं बदलती
गलती माफ हो जाये पर फिदरत नही बदलती
खानपान, रहन – सहन, तौर – तरीके सब अलग है
प्यार मे अन्धा हो जब, नही दिखता है कुछ भी
निकल जाती है जिन्दगी पर उलझन नही बदलती
अन्तर्जातिय विवाह की पहल करने से पहले
समानता लानी होगी जातियो के दायरों मे
मानवता घुलनी ही चाहिए, देश की सभी बयारो मे